गायब हुए भूमि रिकॉर्ड, जवाब तलाश रहे आदिवासी किसान

खरगोन जिले की भगवानपुरा तहसील का दगड़खेड़ी गांव एक बार फिर चर्चा में है। गांव के आदिवासी किसान पिछले कई दिनों से तहसील कार्यालय के बाहर आंदोलन कर रहे हैं। उनका कहना है कि वर्षों से भूमि रिकॉर्ड की गड़बड़ी दूर नहीं होने के कारण वे सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हैं और अपनी जमीन के भविष्य को लेकर असमंजस में हैं।
ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2022 से वे विभिन्न प्रशासनिक अधिकारियों को आवेदन देकर भूमि अभिलेखों में सुधार की मांग कर रहे हैं। किसानों का दावा है कि उनके पास जमीन संबंधी पुराने दस्तावेज और पावतियां मौजूद हैं, लेकिन राजस्व रिकॉर्ड में कई विसंगतियां हैं। 
हाल के दिनों में गांव की कुछ जमीनों को शासकीय भूमि बताए जाने के बाद मामला और गंभीर हो गया। ग्रामीणों को आशंका है कि रिकॉर्ड स्पष्ट नहीं होने से भविष्य में भूमि अधिकारों पर संकट खड़ा हो सकता है।
आंदोलन कर रहे किसानों का कहना है कि रिकॉर्ड की त्रुटियों का असर उनकी रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है। कई परिवारों को किसान सम्मान निधि, कृषि ऋण, फसल बीमा और अन्य योजनाओं का लाभ लेने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा है।
इधर प्रशासन द्वारा रिकॉर्ड की जांच और उपलब्ध दस्तावेजों के मिलान की बात कही जा रही है, जबकि ग्रामीण जल्द से जल्द स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं।
फिलहाल दगड़खेड़ी का यह विवाद केवल भूमि रिकॉर्ड का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा कर रहा है कि वर्षों से लंबित ऐसे मामलों का समाधान आखिर कब और कैसे होगा।

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