विश्व पर्यावरण दिवस विशेष: पौधों को बच्चों की तरह पालते हैं शिक्षक दिलीप पाटीदार, हरियाली से महक उठा छात्रावास परिसर
खरगोन। पर्यावरण संरक्षण केवल भाषणों और अभियानों तक सीमित नहीं है, बल्कि कुछ लोग इसे अपने जीवन का हिस्सा बना लेते हैं। ऐसे ही प्रकृति प्रेमी हैं नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय बालक छात्रावास के वार्डन एवं शिक्षक दिलीप पाटीदार, जिन्होंने पौधों को केवल लगाया ही नहीं, बल्कि उन्हें अपने बच्चों की तरह स्नेह और देखभाल देकर बड़ा किया है।
दिलीप पाटीदार को बचपन से ही हरियाली और प्रकृति से विशेष लगाव रहा है। वे जहां भी पदस्थ रहे, वहां पौधारोपण को अपनी प्राथमिकता बनाते रहे। वर्तमान में छात्रावास परिसर में उनके द्वारा लगाए गए बादाम, पीपल, नीम और बरगद सहित 50 से अधिक पौधे आज विशाल वृक्ष बन चुके हैं। वहीं पिछले वर्ष लगाए गए करीब 130 कोनोकार्पस पौधे भी तेजी से बढ़कर आकर्षक हरित पट्टी का रूप ले चुके हैं।
आज छात्रावास परिसर पूरी तरह हरियाली से आच्छादित दिखाई देता है। सुबह-शाम विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों का कलरव वातावरण को जीवंत बना देता है। परिसर में लगे बादाम के पेड़ अब फल देने लगे हैं, जिनका आनंद छात्रावास के बच्चे और खेल मैदान में आने वाले खिलाड़ी भी लेते हैं।
हरियाली के साथ जैविक खेती भी
दिलीप पाटीदार को बागवानी का भी विशेष शौक है। उन्होंने परिसर में बैंगन, लौकी, टमाटर, गोभी, गिलकी, पालक और मेथी जैसी सब्जियां उगाई हैं, जिनका उपयोग छात्रावास के बच्चों के भोजन में किया जाता है। इससे बच्चों को ताजा और पौष्टिक आहार भी मिल रहा है।
पौधों से करते हैं संवाद
उनकी सबसे अनोखी आदत यह है कि वे पौधों की नियमित देखभाल के साथ उनसे बात भी करते हैं। पौधों के आसपास की सफाई, समय पर सिंचाई, मिट्टी की गुड़ाई और पोषक तत्वों की व्यवस्था वे स्वयं करते हैं। उनका मानना है कि पौधों को भी प्रेम और देखभाल की आवश्यकता होती है। वे हर पौधे को उसी ममता से संभालते हैं जैसे कोई माता-पिता अपने बच्चे का पालन-पोषण करते हैं।
भविष्य की धरोहर हैं पेड़
दिलीप पाटीदार का कहना है कि पौधारोपण केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए निवेश है। आज लगाया गया एक पौधा भविष्य में छाया, स्वच्छ हवा और फल देकर समाज को लाभ पहुंचाता है। उनका संदेश है कि प्रत्येक व्यक्ति को कम से कम एक पौधा लगाकर उसकी जिम्मेदारी भी निभानी चाहिए।
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