विद्वत् परिषद् का प्रथम सारस्वत आयोजन में जुटे विद्वान

संस्कृति संरक्षण और ब्राह्मण समाज के उत्थान पर जोर, शहर के प्रमुख विद्वानों और समाजजनों की रही गरिमामयी उपस्थिति
खरगोन। विद्वत् परिषद् की नवगठित कार्यकारिणी द्वारा अपना प्रथम सारस्वत आयोजन अत्यंत गरिमामय वातावरण में सफलतापूर्वक संपन्न किया गया। यह आयोजन आद्य गुरु शंकराचार्य जी के जन्मोत्सव एवं भगवान श्री परशुराम जी के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में बिस्टान रोड स्थित श्री आशुतोष महादेव मंदिर परिसर में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में शहर के प्रबुद्धजनों, विद्वानों और समाज प्रतिनिधियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि परशुराम बोर्ड के सदस्य पंडित राजेंद्र परसाई रहे, जबकि विशेष अतिथि के रूप में पूर्णानंद बाबा सेवा संस्थान, ग्राम बैडियाव से जुड़े इंद्र टेकड़ी स्थित मंदिर के मुख्य पुजारी श्री सुधीर भट्ट उपस्थित थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ अधिवक्ता, बार काउंसिल के पूर्व अध्यक्ष एवं भारतीय जनता पार्टी के पूर्व मंडल अध्यक्ष श्री मुकेश पंड्या ने की।
मंच पर शास्त्री गादी के पंडित हरिनारायण शास्त्री, विद्वत् परिषद् के अध्यक्ष पंकज दुबे, सचिव पंडित विपिन तारे तथा कोषाध्यक्ष पंडित राजेश शर्मा भी विराजमान रहे। अपने ओजस्वी उद्बोधन में मुख्य अतिथि पंडित राजेंद्र परसाई ने ब्राह्मण समाज के उत्थान के लिए संस्कृत भाषा और भारतीय संस्कृति के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने शंकराचार्य और भगवान परशुराम के जीवन प्रसंगों का उल्लेख करते हुए समाज को उनके आदर्शों पर चलने का संदेश दिया।
अध्यक्षीय उद्बोधन में एडवोकेट मुकेश पंड्या ने कहा कि वर्तमान समय में ब्राह्मण समाज को एकजुट होकर अपनी शक्ति और सामाजिक भूमिका को सशक्त रूप से प्रस्तुत करने की आवश्यकता है। उन्होंने संगठन और सांस्कृतिक जागरूकता को समाज के विकास का आधार बताया।
कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत नर्मदीय ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष भूपेंद्र परसाई, महाराष्ट्रीयन ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष रविंद्र उज्जैनकर, कालिका माता मंदिर के पुजारी सुशील अत्रे सहित अन्य समाजजनों द्वारा किया गया। कार्यक्रम का सफल संचालन विद्वत् परिषद् के पूर्व अध्यक्ष पंडित आनंद स्वरूप मलतारे ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन संस्था के सचिव पंडित विपिन तारे ने किया।
इस अवसर पर शहर के अनेक गणमान्य नागरिकों, समाजसेवियों एवं विद्वानों की उपस्थिति रही, जिनमें अशोक शर्मा, रामनारायण जोशी, सुरेश बडोले, नरेंद्र सोहनी, मनोज बार्चे, गिरीश उपाध्याय, राहुल कानुनगो, संतोष दुबे, महेश शर्मा, संजय व्यास सहित बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। कार्यक्रम ने सामाजिक एकता और सांस्कृतिक जागरूकता का प्रभावी संदेश दिया।

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