गुड़ी पड़वा से शुरू होगा श्री राम जन्मोत्सव, “जहां-जहां पड़े चरण रघुवर के” विषय पर होगा विशेष व्याख्यान

खरगोन (खरगोन फैमिली)। आध्यात्मिक साधना मंडल, तरुण मंच एवं महाराष्ट्र समाज राजेंद्र नगर इंदौर द्वारा इस वर्ष भी श्रद्धा और उत्साह के साथ श्री राम जन्मोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन 19 मार्च से गुड़ी पड़वा के पावन अवसर पर प्रारंभ होगा, जिसमें विभिन्न धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
इस श्रृंखला में 20 मार्च 2026, शुक्रवार को एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया है। कार्यक्रम का विषय “जहां-जहां पड़े चरण रघुवर के” रखा गया है, जिसमें प्रभु श्रीराम के वनवास पथ की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक यात्रा का विस्तृत वर्णन किया जाएगा। इस अवसर पर शिक्षाविद और आध्यात्मिक विषयों के प्रबोधक श्री दिलीप कर्पे (खरगोन) मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहेंगे।
व्याख्यान के दौरान राम वन गमन पथ की अद्भुत यात्रा के अनुभव साझा किए जाएंगे। यह यात्रा लगभग 12 प्रांतों और नेपाल तक फैले करीब 12 हजार किलोमीटर के विस्तृत मार्ग से होकर गुजरती है। इस पथ में 36 नदियां, 10 पर्वत श्रृंखलाएं, 5 वन क्षेत्र और 18 आश्रम शामिल हैं, साथ ही सैकड़ों गांव और अलग-अलग संस्कृतियों से जुड़ी बस्तियां भी इस यात्रा का हिस्सा रही हैं।
इस यात्रा की सबसे विशेष बात यह है कि अलग-अलग प्रदेशों, भाषाओं, वेशभूषाओं और संस्कृतियों के बावजूद हर स्थान पर लोगों के हृदय में प्रभु श्रीराम के प्रति समान श्रद्धा और आस्था देखने को मिलती है। यह अनुभव इस बात का प्रमाण है कि श्रीराम केवल एक धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि भारतीय समाज की सांस्कृतिक एकता के आधार भी हैं।
कार्यक्रम में यह भी बताया जाएगा कि श्रीराम का वन गमन पथ आज के समय में भी अत्यंत प्रासंगिक है। यह मार्ग समाज में समानता, समरसता और बंधुत्व की भावना को मजबूत करने का संदेश देता है। श्रीराम के जीवन के प्रसंग हमें सिखाते हैं कि समाज में वास्तविक एकता तभी संभव है जब हम ऊंच-नीच के भेदभाव को छोड़कर सभी को समान सम्मान दें।
श्रीराम का जीवन आदर्श नेतृत्व का भी उदाहरण प्रस्तुत करता है, जहां समाज के कमजोर और वंचित वर्गों को भी समान स्थान और सम्मान दिया जाता है। इस दृष्टि से राम वन पथ केवल एक ऐतिहासिक या भौगोलिक यात्रा नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और मानवीय मूल्यों का शाश्वत संदेश है।
आयोजकों ने सभी श्रद्धालुओं और धर्मप्रेमियों से इस आध्यात्मिक व्याख्यान में शामिल होकर प्रभु श्रीराम के जीवन दर्शन को समझने और उसे अपने जीवन में अपनाने का आग्रह किया है। उद्देश्य यही है कि हम केवल राम को जानें ही नहीं, बल्कि उनके आदर्शों को मानते हुए अपने जीवन में रामत्व को स्थापित करें। 🙏

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