खरगोन। जिले के बेड़िया क्षेत्र में गणगौर पर्व के दौरान परंपराओं की खास झलक देखने को मिल रही है। यहां ससुराल पक्ष के माने जाने वाले साढ़े सात गांवों में वर्षों पुरानी मान्यता के अनुसार अन्य गांवों से एक दिन पहले ही गणगौर माता के बाड़ी के पट खोल दिए गए। इस विशेष परंपरा के चलते शुक्रवार को ही बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने माता के दर्शन कर पूजा-अर्चना की।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार इन गांवों में “मूठ रखना” और “पाठ बैठाना” अन्य स्थानों की तुलना में एक दिन पहले किया जाता है। यही कारण है कि यहां गणगौर माता के सार्वजनिक दर्शन भी एक दिन पहले होते हैं। इस परंपरा को गांव के लोग आज भी पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ निभा रहे हैं।
इस परंपरा में शामिल प्रमुख गांवों में रावेरखेड़ी (आधा गांव), सांगवी, भोगांव, निपानी, डाल्याखेड़ी, कानापुर, मांधाता, ओंकारेश्वर, थापना और अंजरुद शामिल हैं। इन सभी स्थानों पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो गई थी, जो दिनभर जारी रही। महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में माता की पूजा करती नजर आईं, वहीं पुरुषों ने भी विधि-विधान से आराधना की।
ग्राम कानापुर के बुजुर्गों और रावेरखेड़ी के स्थानीय लोगों के अनुसार यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है और इसका धार्मिक महत्व भी विशेष माना जाता है। मान्यता है कि निर्धारित क्रम और समय पर पूजा करने से परिवार और समाज में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
दर्शन के बाद कई श्रद्धालु माता की प्रतिमा को “सेवा-चकरी” के लिए अपने घर ले जाते हैं, जहां वे विधिपूर्वक पूजा कर पुनः बाड़ी में स्थापित करते हैं। इस प्रक्रिया को भी आस्था और समर्पण का प्रतीक माना जाता है।
वहीं, बेड़िया सहित मायका पक्ष के अन्य गांवों में गणगौर माता के पट शनिवार को खोले जाएंगे। ऐसे में क्षेत्र में दो दिनों तक यह धार्मिक उत्सव अलग-अलग परंपराओं के साथ मनाया जा रहा है, जो स्थानीय संस्कृति की विशिष्ट पहचान को दर्शाता है।
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