खरगोन। जिले के धूलकोट में बुधवार को आयोजित भोंगर्या हाट में आदिवासी संस्कृति की अनूठी झलक देखने को मिली। दूर-दराज के गांवों से बड़ी संख्या में लोग सजे-धजे परिधानों में मेले में पहुंचे। महिलाओं ने पारंपरिक गहनों से खुद को सजाया तो पुरुष भी विशिष्ट वेशभूषा में आकर्षण का केंद्र बने रहे। युवाओं और युवतियों के समूह एक जैसे परिधान पहनकर मेले की रौनक बढ़ाते नजर आए।
हाट में प्रवेश करते ही चारों ओर उत्सव जैसा वातावरण दिखाई दिया। मादल और ढोल-मांडल की थाप पर युवा और बुजुर्ग एक साथ पारंपरिक नृत्य करते दिखे। समाजजन एक-दूसरे को भोंगर्या और आगामी होली पर्व की शुभकामनाएं देते रहे। लोकगीतों और ताल की गूंज से पूरा क्षेत्र देर शाम तक जीवंत बना रहा।
खान-पान की दुकानों पर भी भारी भीड़ रही। ग्रामीणों ने जलेबी, सेव, भजिया, गुड़ से बने व्यंजन और अन्य स्थानीय खाद्य पदार्थों का स्वाद लिया। गर्मी को देखते हुए कुल्फी, लस्सी और बर्फ के गोले की दुकानों पर युवाओं की टोलियां जुटी रहीं। परिवारों ने साथ बैठकर भोजन का आनंद लिया और मेल-मिलाप का अवसर भी बनाया।
बच्चों के लिए लगाए गए झूले आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहे। आकाश झूला, जहाज झूला और जंपिंग झूले पर बच्चों और किशोरियों की लंबी कतारें लगी रहीं। कई युवतियां हाथों पर नाम गुदवाते नजर आईं। वहीं फोटो स्टूडियो में परिवारों ने समूह चित्र खिंचवाकर इस दिन को यादगार बना लिया। मोबाइल से सेल्फी लेने का सिलसिला भी पूरे दिन चलता रहा।
होली को ध्यान में रखते हुए रंग-गुलाल, हार-कंकण, खजूर और चने की दुकानों पर अच्छी खरीदारी हुई। महिलाओं ने आभूषणों और श्रृंगार सामग्री में रुचि दिखाई, जबकि बच्चों ने खिलौनों की दुकानों पर खासा उत्साह दिखाया।
धूलकोट का भोंगर्या हाट न केवल खरीदारी का केंद्र रहा, बल्कि सामाजिक मेलजोल और सांस्कृतिक परंपराओं को सहेजने का भी अवसर बना। गुरुवार को सतपुड़ा अंचल के ग्राम काबरी में भी भोंगर्या हाट आयोजित किया जाएगा, जहां बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
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