66वें अखिल भारतीय प्रौढ़ शिक्षा सम्मेलन में दिलीप कर्पे करेंगे शोध प्रस्तुति

खरगोन। ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर स्थित कलिंग इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज़ (KISS), कलिंगा डीम्ड यूनिवर्सिटी में 21 से 23 जनवरी तक आयोजित होने जा रहे 66वें अखिल भारतीय प्रौढ़ शिक्षा सम्मेलन में पश्चिम निमाड़ की जनजातीय शिक्षा एवं कौशल विकास मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत किया जाएगा।
“सभी के लिए आजीवन शिक्षण को बढ़ावा” विषय पर आधारित इस तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में मध्यप्रदेश के खरगोन ज़िले से ज़िला साक्षरता समिति के पूर्व ज़िला समन्वयक श्री दिलीप कर्पे अपने शोध पत्र का वाचन करेंगे।
श्री कर्पे का शोध पत्र
“पश्चिम निमाड़ ज़िले के परिप्रेक्ष्य में जनजातीय समुदाय की कौशल आवश्यकताएँ एवं सशक्तिकरण”
प्रौढ़ एवं आजीवन शिक्षा की भूमिका को व्यवहारिक रूप में रेखांकित करता है।
देशभर से आए शिक्षाविदों, शोधार्थियों, नीति विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों की मौजूदगी में प्रस्तुत यह शोध जनजातीय समाज की ज़मीनी हकीकत, रोज़गार आधारित कौशल विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में आजीवन शिक्षा की अहम भूमिका को उजागर करता है।
जॉय ऑफ गिविंग समूह के सिराज शेख एवं अशोक जोशी ने बताया कि यह शोध पत्र आदिवासी समाज की वास्तविक आवश्यकताओं को केंद्र में रखते हुए शिक्षा को केवल साक्षरता तक सीमित न रखकर व्यावहारिक सशक्तिकरण से जोड़ता है।
वहीं डॉ. पुष्पा पटेल एवं साहित्यकार राकेश राणा ने कहा कि पश्चिम निमाड़ जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्र में शिक्षा, सामाजिक चेतना, कौशल उन्नयन और आत्मसम्मान के समन्वय की दृष्टि से यह अध्ययन अत्यंत महत्वपूर्ण है।
डॉ. मधुसूदन बारचे एवं डॉ. लवेश राठौड़ के अनुसार, राष्ट्रीय मंच पर क्षेत्रीय अनुभवों और नवाचारों की प्रस्तुति से पश्चिम निमाड़ की पहचान को नई दिशा और प्रतिष्ठा मिलेगी।
इस सम्मेलन में सेवानिवृत्त जिला प्रौढ़ शिक्षा अधिकारी श्री बी. रायक की सहभागिता भी उल्लेखनीय रहेगी।

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