फर्जी जांच एजेंसी बनकर साइबर ठगी: डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर बुजुर्ग से 10 लाख ऐंठे, दो आरोपी गिरफ्तार
खरगोन। डिजिटल अरेस्ट के नाम पर देशभर में फैल रही साइबर ठगी की वारदातों के बीच खरगोन पुलिस को एक बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने फर्जी तौर पर NIA, CBI और ED जैसी केंद्रीय जांच एजेंसियों का अधिकारी बनकर लोगों को डराने वाले अंतरराज्यीय साइबर ठग गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस मामले में राजस्थान के फलौदी क्षेत्र से दो शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जो म्यूल बैंक खातों के माध्यम से ठगी की रकम का लेन-देन कर रहे थे।
यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक खरगोन श्री रविन्द्र वर्मा के निर्देशन में, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) श्रीमती शकुन्तला रुहल एवं एसडीओपी बड़वाह श्रीमती अर्चना रावत के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी सनावद निरीक्षक श्री रामेश्वर ठाकुर के नेतृत्व में गठित विशेष टीम द्वारा की गई। जांच में साइबर सेल खरगोन की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
बुजुर्ग को बनाया निशाना
मामले की शुरुआत 15 जनवरी 2026 को हुई, जब थाना सनावद क्षेत्र निवासी 80 वर्षीय रिटायर्ड प्रोफेसर शशिकांत कुलकर्णी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि 9 जनवरी को उनके मोबाइल पर एक अज्ञात व्हाट्सएप कॉल आया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने स्वयं को NIA मुख्यालय का अधिकारी बताते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर में पकड़े गए एक आतंकी के पास से उनकी पत्नी के बैंक खाते से जुड़े दस्तावेज मिले हैं। आरोपी ने खाते में करीब 7 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेन-देन और उसमें से 10 प्रतिशत कमीशन प्रोफेसर को मिलने की बात कहकर उन्हें गंभीर मामले में फंसाने की धमकी दी।
आरोपियों ने प्रोफेसर और उनकी पत्नी के नाम से गिरफ्तारी वारंट जारी होने की बात कही और व्हाट्सएप पर फर्जी नोटिस भेजे। इतना ही नहीं, तीन दिनों तक लगातार व्हाट्सएप कॉल चालू रखने का दबाव बनाकर उन्हें मानसिक रूप से डरा दिया गया। इसी डर के चलते आरोपियों ने प्रोफेसर से 10 लाख रुपये RTGS के माध्यम से बताए गए बैंक खातों में जमा करवा लिए।
तकनीकी जांच से हुआ खुलासा
जब पीड़ित को ठगी का आभास हुआ, तो उन्होंने तुरंत थाना सनावद पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर NCRP पोर्टल पर शिकायत पंजीबद्ध की और बैंक अधिकारियों से समन्वय कर खातों की जानकारी जुटाई। तकनीकी विश्लेषण में सामने आया कि ठगी की राशि बैंगलोर स्थित बैंक खातों के जरिए राजस्थान निवासी वीरेंद्र के म्यूल अकाउंट में पहुंची थी।
इसके बाद पुलिस टीम को राजस्थान रवाना किया गया, जहां से वीरेंद्र पिता रुपाराम जावा (19) निवासी फलौदी और रामस्वरूप पिता घेवरराम विश्नोई (21) निवासी फलौदी को अभिरक्षा में लिया गया। पूछताछ में दोनों ने स्वीकार किया कि उनके साथी अरविंद और संजय बैंगलोर से कॉल कर लोगों को डिजिटल अरेस्ट की धमकी देते थे, जबकि वे दोनों खातों से पैसे निकालकर उन्हें सौंपते थे।
करोड़ों के लेन-देन और जब्ती
आरोपियों ने यह भी कबूल किया कि उन्होंने तमिलनाडु के एक व्यक्ति को डिजिटल अरेस्ट की धमकी देकर 17 लाख रुपये की ठगी की थी। जांच में सामने आया कि आरोपियों के पास मौजूद म्यूल बैंक खातों में करोड़ों रुपये का ट्रांजैक्शन हुआ है। पुलिस ने उनके कब्जे से 3 लाख 1 हजार 900 रुपये नकद, 17 बैंक व एटीएम कार्ड, 10 चेकबुक, 5 पासबुक, 2 मोबाइल फोन और 4 सिम कार्ड जब्त किए हैं।
पुलिस ने साफ किया है कि “डिजिटल अरेस्ट” नाम की कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती। किसी भी व्यक्ति को यदि इस तरह की कॉल या मैसेज प्राप्त हो, तो वह तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करे। फरार आरोपियों की तलाश जारी है और मामले की जांच आगे भी की जा रही है।
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